Category: रोग और उपचार

दाढ़ का दर्द

पहला प्रयोग : कपूर की गोली अथवा लौंग या सरसो के तेल या बड़ के दूध में फिगोया हुआ रुई का फाहा अथवा घी में तली हुई हींग का टुकड़ा दाढ़ के नीचे रखने से आराम मिलता है |  दूसरा प्रयोग : त्रिफला का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करने से लाभ होता है |  तीसरा प्रयोग : गर्म […]

बहरापन होने पर क्या करें

पहला प्रयोग : दशमूल, अखरोट अथवा कड़वी बादाम के तेल की बूंदे कान में डालने से बहरेपन में लाभ होता है |  दूसरा प्रयोग : ताजे गोमूत्र में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर हररोज कान में डालने से आठ दिनों में हो बहरेपन में लाभ होगा है |   तीसरा प्रयोग : आकड़े के पके हुए पीले पत्तो को […]

नाक की हड्डी बढ़ जाना

इसमें कभी ऑप्रेशन न करवाये | आगे के प्रकरण के अनुसार उपवास करे एवं सर्दी जुकाम की ही चिकित्सा दो तीन माह तक करते रहे | 

घ्राणशक्ति का अभाव

घ्राणशक्तिनाशक रोग में मरीज़ को नाक द्रारा किसी भी प्रकार की गंध का एहसास नहीं होता | ऐसे मरीज़ को लहसुन की पत्तियों अथवा कलियों के रस की बुँदे नाक में डालने से लाभ होता है | 

रतौंधी अथार्थ रात को न दिखना

पहला प्रयोग : बेलपत्र का २० से ५० मिलीलीटर रस पीने और तीन से चार बूँद आँखों में डालने से रतोंधी में आराम होता है |  दूसरा प्रयोग : श्याम तुलसी के पत्तो का दो – दो बूंद रस 14 दिन तक आँखों में डालने से रतोंधी में लाभ होता है | इस प्रकार से आँखों का […]

मंदाग्नि और अजीर्ण

पहला प्रयोग : 2  से 5 ग्राम पकी निबोली  अथवा अदरक में 1 ग्राम सेंधा नमक डाल कर खाने से या लौंग एवं लेंडीपीपर के चूर्ण को मिलाकर 1 से 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ सुबह – शाम लेने से मंदाग्नि मिटती है | यह प्रयोग दो सप्ताह से अधिक न करें |  दूसरा […]

मुँह में छाले

पहला प्रयोग : पान में उपयोग किया जाने वाला कोरा कत्था लगाने से छालों में राहत मिलती हैं | दूसरा प्रयोग : सुहागा एवं शहद मिलाकर छालो पर लगाने से या मुलहड़ी का चूर्ण चबाने से छालों में लाभ होता है | तीसरा प्रयोग : मुँह के छालों में त्रिफला की राख शहद में मिलकर लगायें | थूक […]

दाँत की सफाई तथा मजबूती

पहला प्रयोग : नीबू के छिलको को थोड़ा सा सरसो का तेल डालकर दाँत और मसूड़ों को घिसने से दाँत सफ़ेद एवं चमकदार होते हैं, मसूड़े मजबूत होते हैं, हर प्रकार के जीवाडुओं का नाश है तथा पायरिया आदि रोगो से बचाव हैं |     दूसरा प्रयोग : नीम, बबूल, बोलसिरि (मौलसिरी), बड़ और करंज  की दातुन करने […]

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